"Avgun Kare Samudra Sam, Ginat Na Apno Jaan, Rai Sam Bhajan Ko, Manat Meru Saman" - Shri Dhruvdas, Bayalees


"Avgun Kare Samudra Sam, Ginat Na Apno Jaan, Rai Sam Bhajan Ko, Manat Meru Saman" - Shri Dhruvdas, Bayalees Leela

“अवगुण करे समुद्र सम, गिनत न अपनों जान | राई सम भजन को, मानत मेरु समान || ”
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला
राधा रानी के स्वभाव के विषय में एक रसिक संत ने बताया है कि समुद्र के समान अवगुण होते हुए भी, किशोरीजी उन अवगुणों को देखती नहीं और राई के समान भजन करते हुए भी यानी बहुत ही थोड़ा, उस भजन को भी किशोरी जी मेरु पर्वत के समान मानती हैं |


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